बि.स. २०८२ बैशाख ९ गते घटो रहस्यमय हत्याको एक बरस पुगो हए।कंचनपुरको बेलडाडी गाउँपालिका वार्ड नम्बर ३ के किसान तथा दुध व्यवसायी हरिकिसन रानाको अग्निदाहसे रहस्यमय तरिकासे मृत्यु भओ रहए।बडो बिभत्स ढंगसे घटना भओ कहिके पुरो समाज आक्रोसित रहए। जाको सत्यतथ्य छानबिन और दोषी पता लगाएके कानुनी कारबाहीके ताहि पिडित परिबारके तरफसे एक बरस पहिले एक जाहेरी दओ गओ रहए, समाजके अगुवा फिर जाको निष्पक्ष छानबिनके ताहि तमान दाओ प्रहरी प्रशासन और सरकार समक्ष माग करि रहएँ। पर जाको ना जर पता लगो ना पलइ।
पिडित परिबार बेलडाडी गाउँपालिकाकि उपाध्यक्ष शान्ति नाथके उपर पहिलेसे शंका करत आओ हए।घटना होनसे पहिले अपन परिबारके सदस्यनके हरकिशन कहत रहए कि अगर मेरो कछु अनहोनो घटना हुइ हए तओ जान लिऔ कि बामे शान्ति नाथको हाथ हए। जासे पहिले हरकिशन राना और शान्ति नाथको बिचको १२ लाखको चेक प्रकरणमे बडो विवाद और लम्बो द्वन्द भओ रहए। जासे शान्ति नाथके बडो धक्का लगो रहए। अनुदान दिबाए बापद घुस मागन ताहि नाथ रानाके तमान खालको दबाब, धम्की, मानसिक तनाब देत रहए कहिके पिडित परिबार कहत आए हएँ।जाके कारण तमान महिना हरकिशन घरसे बाहेर बैठो रहए।जा क्रममे राना और इन्द्रा नाथ बिचको अडियो एक मजबुत प्रमाण हए।जाके पाछु राना पत्रकार सम्मेलन करके चेक प्रकरणको पर्दाफास करि रहए। जासे नाथके पैसा फिर ना मिलो और सामाजिक बेइज्जती झेकन पडो रहए। नाथमे जा एक प्रकारको कुन्ठाके रुपमे रहो और बदलाको भाव मनमे रहनके कारण जा घटना नाथ करबाइ कहिके पिडित परिबारको प्रस्ट कहाइ हए।
पिडित परिबारको पुनः जाहेरी और शान्ती नाथ हिरासतमे
जहे बैशाख ३ गते पिडित परिबार कर्तव्य ज्यान मुद्दा सहित किटानी जाहेरी लइके जिल्ला प्रहरी कार्यालय, महेन्द्रनगर गइ रहए। किटानी जाहेरी पाछु प्रहरी शान्ती नाथके हिरासतमे लइ रहए। अभे १९ दिन बित गए हएँ। प्रहरीके अनुसार जा घटनाको बहुआयामिक तरिका और तमान कोणसे अनुसंधान होन डटो हए। पर अभे तक हाथ लागो सुन्ना हानि हए।बेलडाडी इलाका प्रहरी कार्यलयके इन्सपेक्टर जय पार्कि अभे जा घटनाको अनुसंधान अधिकृत हएँ।प्रहरी पिडित परिबारके उपर और मृतक रानाके उपर बेहद अनुसंधान कर डारि हए। जाहेरी बमोजिम नाथके उपर फिर तमान अनुसंधान करि कहिके प्रहरी कहत हएँ। चेक प्रकरणको अच्छेसे अनुसंधान होन पडो कहिके पिडित परिबार और सामाजिक अभियन्तनको जोडदार माग हए। नाथसे जुडे आदमिनको अनुसंधान ठिक ढंगसे होन पडो कहिके माग हए।
हत्याकि आत्महत्या
प्रहरी रानाको हत्या भओ कि आत्महत्या भओ कहिके फिर गहन अनुसंधान करि हए। आत्महत्याके कोणसे बहुत जाधा अनुसंधान भओ हए। घटनाको प्रकृतिसे कमसे कम हत्या कि आत्महत्या हए अबतक प्रहरीके निरकौल करन रहए। जाके प्रहरीको कमजोरीके रुपमे लओ गओ हए।घटना स्थल भारतको सिमा नजदिक होन कारणसे उतएके आदमिक फिर घटना करबानमे संलग्न हुइ सकत हए, जाको अनुसंधान अभे तक ना भओ हए।
सिआइबीको अनुसंधान और पुनः जिरोसे अनुसंधानको माग
हरकिशन राना घटना पाछु सिआइबीको टोली एक महिना जा घटनाको अध्ययन करि रहए पर जाको प्रतिबेदन लुको हानी हए, बो प्रतिबेदन पिडित परिबार और नागरिक समाजसे दुर रखो गओ हए। रानाके न्यायके ताहिँ नेपाल रानाथारु समाज हर कोशिस कर रहो हए।लोकल स्तरको अनुसंधानसे घटना छानबिनको निश्कर्ष आनमे नागरिक समाज आशंका करि हए। तबहिके मारे एक दावँ फिर जिरो लेभलसे उच्चस्तरको टोलीसे छानबिन होन पडो कहिके नेपाल रानाथारु समाज जोडदार माग करन डटो हए। एक बरस पहिले तमान राजनैतिक दबाबके कारणसे फिर जा घटनाको निश्पक्ष छानबिन ना भओ कहिके आशंका हए, बो समयको गृह प्रशासन और प्रहरीको भुमिकाके उपर फिर तमान प्रश्न उबजे पडे हएँ। अभे सरकार परिवर्तन पाछु पिडित परिबार कछु न्याय पए हए कि कहिके आसा करे पडे हए। पिडित परिवार अभेके सरकार पक्ष और प्रतिपक्ष दोनोके नेता, सांसद, मन्त्रीसे न्यायके ताहि गुहार लगाए पडे हएँ। जा घटना रानाथरुवा समाजके हरेक मनमे गुजन डटो हए, व्यापक रुपमे जाको आवाज उठो पडो हए। जा घटनाको छानबिनके विषयमे कंचनपुरके सांसद दिपक बोहरा और कृपाराम राना आवाज उठाइ हएँ। कृपाराम राना बेलडाडी चौकी जाएके और पिडित परिबारके आदमिनके भेटके तमान छलफल फिर करि हएँ। बहे क्षेत्रके सांसद जनक सिह धामीके फिर जा घटनाको छानबिनको निश्कर्षमे पुगान भुमिका खेलदेन पिडित परिबार अनुरोध कर रहो हए। सरकार अगर अबभिर जा घटनाके निश्कर्शमे पुगान कमजोरी करत हए तहो रानाथारु समाज कडासे कडा आन्दोलनकि चेतावनी फिर देत आओ हए।
पिडित परिबार बडो मुस्किलसे गुजर रहो
पिडित परिबार न्यायको खोजीमे रातदिन दौर रहो हए।परिबारके जा दुख ता हइअए, लेकिन और परिवारके पिडित बनान डटो हए आर्थिक कारण। मृतक हरकिशन रानाको करो भओ बिमाको रकम परिबारके ना मिल पान डटो हए। मृत्युको कारण ना पता लागन तक बिमा कम्पनीके बिमा भुक्तानी करन कानुनी जटिलता हए।हरकिशन राना एक व्यवसायी होन कारणसे बिनको बैंकमे लोन फिर हए, अब बो लोन तिरनको दायित्व फिर परिबारके उपर हए। रानाके बाल वच्चा अभे बो तिरन असमर्थ हएँ।
स्रोत : नयाँ नेपाल गोरखापत्र







