लुप्त आवस्थामे रानाथारूकि “हाेरि” जनबाेली सहित

लुप्त आवस्थामे रानाथारूकि “हाेरि” जनबाेली सहित

धनगढी , २९ फागुन

बहुतसे गाँवमे हाेरीकाे डंकातक न बाजनसे लुप्त आवस्थामे पुगाै हए रानाथारूकि हाेरि नाँच , रानाथारु समुदायमे होरी तिउहारमे नाचनबालाे होरी नाँच बहुतसे गाँवमे खेलन छाेडदैहएँ । जा बेरा रानाथारू गाँवमे होरी नाचमे झुमेहुत्ते । माघ पुर्णिमाक दिन से शुरू भइ हाेरी फागुपुर्णिमाके पच्छु अाठाै दिनमे खखडेहराके दिनसे हारी समाप्त हाेतहएँ । यनि एक महिना आठ दिन रानाथारू समुदाय ठडाैवाँ, लाेहकाैवाँ ,सादा , बधाइहाेरी , खिचडी औ गडवाली होरी खेलत हएँ । नाँचके होली तिउहार मनातहएँ जेबेरा बच्चा से बुढातक हाेरीमे नाँचत हए ।

ठडाैवाँ होरीमे लाेग इकल्ले खेलत हएँ । एेसी हाेरी मतबरीया लेन या एक घरसे दुसरे घर हाेरी हाेरी लैजान बेरा खेलत हएँ । सादा हाेरी लाैडिया इकल्ली खेलत हएँ कहेसे लाेहकाैवाँ औ बधाइ हाेरी रामायण , प्रेमसागर या महाभारतकि कथामे अधारीत गितमे खेलत हएँ । खिचडी हाेरी लाैडालाैडिया मिलके दुइ लाैडाके बिचमे लाैडिया खिचडी कुचके खेलत हएँ । रानाथारू समुदाय घरघरमे नाचके हि हाेरीकाे तिउहार मनात हएँ ।

रानाथारु समुदायक पहिचानसे जुडाे होरी नाच अभयके लाैड लाैडिया या नयाँ पुस्ताके जा के बचानमे काेइ ध्यान नायदेनसे लुप्त अवस्थामे पुगीगइ रानाथारून कि हाेरि बडेबुजरूग लाेगनकाे कहाइहएँ ।
अभयके रानाथारुक माेढी मदारी अपन लाेक, कला संस्कृति अंगीकार न करनसे अपनाे पुरानाे परम्परा लोप हाेतजाएरहाे हए ।


‘अभयके युवा पुस्ता बहिरिया संस्कृतिके भित्रियानसे यसाे गति अाऔहए जासे का दिखात हए कहेसे रानाथारु समुदायको परम्परागत नाच लुप्त हुइगऔ ।’ तिउहार पिच्छे अगल अलग खेलनबालाे नाँच रानाथारु समुदायके युवा पुस्ता अपन कला संस्कृति अंगिकार करन नसिकनसे लुप्त हुइरहाे बुद्धिजिबीकाे बुझाइहए ।

जहे विषयमे रानाथारू डटकम एस एम एस मार्फत अपन पाठक वर्गनके म्यासेज पठाइके प्रतिक्रया लएरहे हमर प्रश्न रहए रानाथारू काे वडाे तिउहार ” हाेरी ” १ महिना ८ दिन हाेरी खेलके मनातहएँ , जा बर्ष बहुतसे गाँवमे ढाेलकाे डंका तक नाबाजाे कहेसे तुमहर बिचारमे हाेरी तिउहारके बचान ताँहि अब का करन पडैगाे ?

तव उनकाे प्रतिक्रया एेसाे हए ।

धिरेन्द्र राना पिपरिया से अभय मय धनगढीमे बैठत हैँ । जब सगरमाथा सिमेन्टमे मय काम करतरहै । अज जा बात सुनो जब अच्छे लागो हमर संस्कृती बहुत पैधनलागे है । जा के जरूर सबय दादा भइया मिलके बचान जरूरी हए । अउर जउन लगे है उनके सब मिलके सहयोग करन पडो अउर ना करपात है त गलत मत कहै ।

सरन राना  हमर पुरानी  संस्कृतके बचान पडो ।

यम तिर्थु है मिर बिचार मे जा साल सयद कोरोना virus ke कारण से थोणि भिण भाण करन ना कहि है सरकार बहे कारण आबखिर तमान शे गअो मै होरि ना खेलन को कारण हुिइ सकत है!!

बिबेक राना अपन कलचरल ना छोडन नपडो ।

मए हेम राना ,शुक्लाफाँटा न. पा. ६ कञ्चपुर रहन बारो । बहुत बहुत धन्यबाद रानाथा? डट कमके जौन जा मौका दए बिचार धरनके ताही . मए जा समस्याके समाधानके ताहीं कोसिस करथ हौँ . होरी तिउहार का हए ? आपनके थ?वा अब होरी नाए मान रहेहएँ काहेकी आपन पाश्च्यात संस्कृती से प्रभावीत हएँ काहेकी उनकी पहीरन विश्वके लालाहीत बनाइ हए . आजकाल के आदमी गीत गान , होरी खेलन औ ढोल डंका बजान भ’ल गए हएँ . इतकए नाए बे होरीक महत्व फीर भ’ल गए हएँ . जा एक बडो समस्या हए , जा समस्या समाधानके ताहीं राना थ?वा गनँवमे संस्कृती जागरण सम्बन्धि जनचेतना म’लक कार्यक्रम करन जरूरी हए .

नाम देश भक्ति तुमहर कदेखाै सर अभयकाे युग आधुनिक युग हए ,, ,, हजुर हरु ले ,, त आफ्नो , युग मा पहिचान बचाउनु भो तर यो ,, युग भनेको , शरिर छोप्नो तरिका त छैन ,, के ,, बचाउ छ्न र पहिचान ,, , भेषभुसा ,, रितिरिवाज ,, ,सबै लोब हुँदै छ ,, मेरो बिचार मा चाइ रितिरिवाज बचाउन , लाई ,, सर्ब प्रथम। 1 समाज , सुधार्नु पर्यो ,, 2 आधुनिक रितिरिवाज हताए र , पुरानो ,, रितिरिवाज ,, ,मनाउ नु पर्यो 3 युवा युवती हरु लाई ,, रितिरिवाज and भेषभुसा , सिखाउनु पर्यो ,

राणा थारू युवा मंच सस्कृति प्रमुख Dillu rana राम राम नाते दार , राणा थारू सस्कृति धीरे धीरे विलुप्त होत जाए रही है हमारी राणा थारू सस्कृति मै पाश्चात्य सभ्यता हावी हुए गई है और हमारी नई पीढ़ी के युवा हमारे बाध्य यँत्र अर्थात ढ़ोल, मजीरा, मृदंग, बजान के तहि, आधुनिकता के कारण दिलचस्पी न ले रहे है, पाश्चात्य सभ्यता इतनी हावी हुई गई है कि जो हमारी आदि काल से चली आई सस्कृति के भूलत जाए रहे है l हमारे गांव मे बहुत कम जगह मे होरी खेल रहे है, जा को सवसे बड़ो कारण है हमारे गांव मे सामाजिक असमानता है पुराने समय मै राणा थारू लोग एक धर्म कै मानत रहे एक समाज कए मानत रहे, और आदि काल से अपने देवीदेवतन कए पूजत रहे l, वर्तमान समय मै राना थारू अनेक पंथ कए मानत है जैसे कोई राधा स्वामी वन गओ है, कोई ईसाई वन गओ है कोई, निरंकारी बन गौ है, कोई भोले बाबा बन गौ हैl, जे सब पुरातन काल से चली आई सस्कृति कए नस्ट करन को काम करत है l, हम सब राना थारू कै जागरूप होने पड़ो l एक महीने आठ दिन की होरी आज भीv मनाई जाए रही है  ३० दिन जिन्दी होरी और लगभग ८ दिन मरी होरी खेलत है l, हमारी पुरातन सस्कृति के संगरक्षण व सम्बर्धन करना तहि, राना थारू कए होरी मिलन सम्मान समारोह को आयोजन समय समय पर होनो चाहिए l, जैसे प्रत्येक गांव के मुखिया कए सांस्कृतिक आयोजन के तहत सम्मानित करना चाहिए, सांस्कृतिक आयोजन के तहत ढ़ोल मृदंग मजीरा, बजान बारे कए पर्तिस्पर्धा को आयोजन करना चाहिए, और गीत गान बारे कए सम्मानित करना चाहिए l ऐसी प्रतिस्पर्धा के आयोजन से हमारी राना थारू सस्कृति को सरक्षण व सम्बर्धन होगो l. अपनी छोटीसी प्रतिक्रिया के माध्यम से सुझाव प्रस्तुत करो हाओ l

भक्तराज राना बेला गाँवसे मीर विचार मे 1) सबसे पहिरे राना थारू क्यालेन्डर बनान और लागु करन जरूरी हय । 2) हरेक गाउंमे संस्कृती संरक्षण सम्बन्धी जनचेतना देन जरूरी हय । 3) गाउ गाउंमे होरी व्यवस्थापन और संचालन समिती बनान जरूरी हय । 4) होरी मे सुधार करके वैज्ञानीक ढङ से अग्गु बढन जरूरी हय । 5) होरी बचान ईकल्लो नाई कि आकर्षण को केन्द्र बनान जरूरी हय । 5) बडो कार्यक्रम जैसे की होरी सम्मेलन करन जरूरी हय ।

मै उरमा से बाल गोबिन्द राना।होरि येक आपन कि संस्कृति अनतर्गत पडत है हमै त होरि बचानै पडेहै।तर ज होरि रात के न खेल के दिन के खेलन पडो।बो फिर निश्चित समय मे तओ सब आदमी येक घरी देखन पुग जैहै।बहुत आदमी हुइहैत खेलन बारेन को और हौसला बढ जैहै।

मय जानमति राना बेलाैरी ६ हमर गाँवमे हेरी खिलानताँहि भलमन्सा घरघरसे एक एक जनिके चाकरसे बुलबाइ हए ।

भंगि (भगत) राना मनेहरा गाँव । पढेलिखे संगय अपन संस्कृतिमे ध्यान देनरहए। एकबात अाै नेपाल रानाथारू समाज काे नारा रहए कुरीति हटामयँ निरझल समाज बनामयँ , अब जाे हए संस्कृतिमे कुरीती लाएरहे हए जसे कि फागन महिनामे व्याहा करनाे । रानाथारू संस्कृतिमे हाेरी जाैन दिनसे हाेरी धरत रहए बहे दिनसे पुरिपकान बाली ताइ तक नबैठात रहए व्याहा करन दुरग ओ । तओ जे बातके नेपाल रानाथारू समाज देखन पडाे न । फागुनमे व्याहा करलय पर हाेरीमे व्याहा नकरनरहए।

लालबहादुर राना धनगढी गाँव मिरबिचारमे रानाथारूनकाे सबसे बडाे तिउहार कहनसे हाेरी रहए । पर हाेरि खेलनबाले बच्चा सब लिखनपढनसे हाेरी ना खेलत हएँ । जक संरक्षणके ताँहि जाैन पहिले रातरात भर नाचत रहए अब सबके ठिन टइम नहए सब अपन अपन काममे लागे हए तहु फिर जक हाेडिफाइ करके हाेरीकाे तिउहार मनान अाै सरकार फिर थुर जध्दादिन बिदा दइखेन ताकि बच्चालाेग हाेरीक तिउहार मनापमय ।

सेयर कर दियो ।

विज्ञापन