सुन्य लागत प्रकृतिक कृषि

सुन्य लागत प्रकृतिक कृषि

रानाथारू खबर ,

धनगढी , १८ माह ।

अभय किसानमे बहुत बडाे समयहए लागत अनुसारकाे मुनाफा नाहुइरहाे हए धनगढी उपमहानगर पालिका वडा नं. १५ के वडाअध्यक्ष फुलराम चाैधरी कहिहएँ । कृषिमे किसाननकाे मनाेबल घटत जाएरहाे हए अाैर कृषिमे अाक्रषण कम हुइरहाे हए ।

अभय अाैद्याेगिककरण से खेतिमे बहुतमेलके रसायनि मल , किटनासक दबाइ डारनसे उत्पादन भअाे बलीमे बाकाे असरसे जहारयुक्त खाना खानसे अादमिमे तमानमेलकि बिमारी पैदाहुइके बडाे समस्या दिखाइरहाे हए , अाैर जा से मुक्ति पानके ताँहि काेइ फिर अादमि लागैगाे , नेपालमे अभय जा नयाँ प्रबिधि हएर पर  भारतके मध्य प्रदेश निबासि सुवास पलेकर से कृषि प्रविधिमे एक गाइयाँ से ३ बिगहा जमिके उब्रर करसिकंगे  अाैर जासे किसान लागत मुल्य जिराे करसिकंगे कहिहएँ ।

जा प्रबिधिकबारेम भारतके झाँसिमे मय ५ दिनकि तालिम लैके अाअाे हवँ अाैर हिन वडा नं. १५ मे  ३ दिनकाे कार्यक्रम माह २० से २२ गते तक संचालन हुबैया हए । कार्यकममे मुख्य प्रशिक्षक त ना अमंगे उनकाे भिडियाे प्रस्तुत करंगे अाैर मय साेयम सहयक प्रशिक्षक बनके ३ दिनकाे कार्यक्रम चलामंगाे । अाैर एक दिन कम्पाेषट मल बनानके ताँहि अलगसे तालिम देमंगे कहिके अध्यक्ष चाैधरी  बताइ हएँ ।

जा कार्यक्रम से हमर किसान ददाभइया  जाहरबालाे खानासे बचसिकंगे अाैर किसानकाे मागअनुसारकाे मुनाफा फिर हाेबैगाे बताइहएँ अध्यक्ष चाेधरी ।

पत्रकारकाे एक प्रश्न ः अभय किसान रसायनि मल डारत  अाएरहे हएँ बे किसान जाैन कि अपन घरकाे कमपाेष्ट मल डारन पडत हए कहिके कैसेकरके समझाबैगे ?

जा काे जवाफमे  बे कहि सबसे पहिले त उनसे रसायनिक मल अाैर कमपाेस्ट मल बिचकाे फाइदा गुण अाैर अबगुणके बारेम बढिया से बतामंगे रसायनिक के कारणसे कित्ताे बिरामि हुइरहे हएँ जैसी कि डाइभिटिज , अाैर जा रसायनिक मलसे जमिनमे पडाे असरके बारेम बतामंगे अध्यक्ष चाैधरी कहि ।

प्रश्न ः जा कार्यक्रमसे कैसे कैसे किसान प्रभाबित हुइसिकंगे ?

जा  प्रश्नकाे जवाफमे अध्यक्ष चाैधरी कहिकि जासे प्रत्यक बर्ष मल , बिउ , किटनासक दबाइ चाहनबाले किसानके ताँहि बहुत फाइदा जनक हए बताइ हएँ । अभय किसानके खेतिक सिजनमे ऋण सापट करके जे सब खरिदके डारन पडरहाे हए अाैर जब रब्बि घरमे अात हए भाअाे न कुभाअाे बेचके ऋण चुकान पडत हए ।

जब किसान ददाभइयानके काेइ खर्चा ना लगइगाे तअाे प्रतिफल ज्यादा हाेबैगाे बताइहएँ अध्यक्ष चाैधरी ।  एेसिकरके सुन्य लागतमे प्रकृतिक कृषि करसिकंगे किसान ।

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