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बहुप्रतिभा कि धनी प्रेणादायीक स्रोतसे भरिपुर्ण महिला आरती रानाक जीवन गाथा

बहुप्रतिभा कि धनी प्रेणादायीक स्रोतसे भरिपुर्ण महिला आरती रानाक जीवन गाथा

खाेज नन्दलाल राना/ धनगढी २६ सामन ।

बहुप्रतिभा कि धनी प्रेणादायीक स्रोतसे भरिपुर्ण महिला आरती राना । उनको गौरव गाथा आज दुनिया भरमे हए । गोवरौला गाँव चन्दनचौकी पोष्ट जिला लखिमपुरखिरी उत्तरप्रदेश भारत थारु क्षेत्रकी एक गरिब किसान परिवारमे जन्मी महिला आरती राना । उनको जन्म म‌गलपुरवा गाँवमे सन १९७६ अगस्त ८ मे स्वा दउवा रामभजन राना और अइया रिना रानाक कोखसे जन्मी रहए ।

उनको व्याह गोवरौला गावके श्रीकृष्ण कुमार रानासे भौव हए । उनके गौतम औ गौरब दुई लौडा हए । साधारण परिवारमे जन्मी आरती रानाक पढाईलेखाइ उत्नो नाहए तहु फिर अपन परिवार बढियासे चलात आइरहि हए । गोवरौला गाँव दुधवा नेस्नलपार्कसे जुडोक कारणसे बहुतसे संघसंस्था अध्ययन अनुसन्धानके क्रममे गाँवमे आतजात हए । जैसेकी डब्लु डब्लु एफ, जनजाति परियोजना, स्वारोजगार परियोजना लगायत संस्था हए ।

बे संस्था मार्फत दुधवा नेस्नल पार्क आसपासके गाँवके आदिवासीनके आर्थिकमे टेवा पुगान हिसाबसे उनके स्वरोजगार जैसे काम सिखानके ताँहि तालिमको शुरुवात करिरहएँ । बे तमान संस्था तालिमसे बहुत मेलकी समान उत्पादन करन त सिखाइ पर बजार व्यवस्थापन करन नसिखानसे तालिमको उतनो प्रभावकारी नहुइपाई । जब मय सन १९९७ सालमे तालिम लैके थारु हथकरघा घरेलु उद्योग नामसे शुरु करोरहौ ।

शुरुमे कामकरनमे बहुतसे दिक्कत आई घर परिवारमे मतभेद, इकल्ली महिला घरसे बाहेर जानो, दुसरी महिलनके लैके समान प्रदर्शनिमे जान, समाजमे बात काटनो जे सब कारणसे बहुत दिकत आइरहए । बहुत दिन तक हमर मियाविविक विच बोलचाल नहोत रहए, फिर मय धिरेधिरे समझातए कामको शुरुवात करोरहौ ।


सबसे पहिले बजार व्यवस्थापन कैसे करन हए कहिके मय जक बारेम अध्ययन करन ताँहि विभिन्न सभासम्मेलन, अध्ययन भ्रमणमे जान, तालिमगोष्टीमे सहभागि बनन जासे मोके बजार सम्बन्धि थोरी पताचलोे, बजार बढिया हए पर हमर पहुच नाहोनसे हमर उत्पादीत समान बजार नापएरहे हए । तओ जाइके मय १०/१० जनी महिलनको समुह बनाएके कामको शुरुवत करो सन २००८ की योग सिविरमे ७ हजार योग पिस दरी बनानके अडर मिलो तओ जाइके मिर पहिचान ट्रएफिट नामक संस्थासे भई जा संस्था की बजार विश्वमे फैलो हए और दुसरी बात आदिवासीसे उत्पादन भौ जैसो समान फिर खरिदलेत हए और शुरुमे मोके १० लाख बारबरको समान निर्माण करनको काम दई ।

काम निभटान ताँहि मय आसपास गाँवकी महिलनको १० से १२ जनिक छोटे छोटे समुह बनाओ लगभग ५०८ जनि महिलाको टिम बनाए । सब महिलादिदीबहिनिय मिलके काम निभटाए । मिर काम देखके सन २०१५ मे पहिली बार मोके रानी लक्ष्मी वाई विरता पुरस्कार मिलो, सन २०२० में मोके नारी शक्ति पुरस्कार मिलो । हिनसे काम करनको हौसला बढतचलो गओ मय अपन काममे निरन्तर लगो रहो जब मय सन २०२२ मे दुसरी दप्फेर महामहिम राष्ट्रपतिके हातसे नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करो तओ मिर खुशिको सिमा नारहो ।


आरती राना कहि “मय हरेक दिदीबहिनियासे सहभागि होन कहत रहौ तुम मिर पच्छु चलौ तुमहु सिखौ का पता तुमहु सम्मानित हूइसकत हौ अभय देशभरमे हमर विभिन्न समुहमे पाँच हजारसे जद्धि महिला दिदीबहिनिया जुडि पडिहए । हमर संस्थासे जुडि भइ महिला समान निर्माणके संगय महिला बचत, महिला सशक्तिकरणके ताँहि तमान मेलकी तालिम संचालन करत आएरहो हए । मय नेपालमे बौडरसे जुडे बहुतसे गाँवमे औ विहार लगायत ठाँवमे मय तालिम देन गाओ हौँ । समान देख देखके मुल्य हए । पाँच सय से लइके पाँच हजार तकको मोल हए , अब मय रानाथारु घाँघरीया अँगिया सिनकी तालिम देनको फिर व्यवस्था करँगो ।”


औ आरती राना कहि “मय कामको अडर लैके आत हौ, बो काम मय महिलनके देत हौ अभय मिर हतघरगा गोवरौलामे ४० से ४५ जनी महिला काम करत हए बे महिलनके मय मासिक १५ हजार तलब देतहौ । उनको उत्पादित समान मय बजारमे लैके जात हौ । अब त मिर घर बैठे अडर आत हए । अडर समानको २० प्रतिशत रकम जमा करत हौ बाँकी रकम समान तयारके बादमे भुक्तानी होत हए ।” मिर घर बैठी महिलनसे खास करके अनुरोध हए तुम खाली औ बेरोजगार हुइके मत बैठौ कोइ न कोइ समान बनाबौ, बनोभौ समान तुम नबेचपाए तओ मिर ठिन लैके आइयो मय खरिदंगो कहिके बताई हएँ ।


आज दुनियाँ भरके लोग आरती रानाके नारी शक्तिके नामसे जानत हए ।

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