खरहा और कछोहाकी कहानी

खरहा और कछोहाकी कहानी

जय बहादुर राना
लालझाडी गा.पा १, बाइस बिचवा, कञ्चनपुर
(शिक्षक, नवोदय अ.विद्यालय)

खरहा और कछोहाकी बात ना सुनेभए आदमी सायद कमए होमङ्गे हानी मोए लागत हए । जा बातके मए कुछ चरणबद्ध हिसाबसे अग्गु बढान चाहत हौं । जा के चरण ऐसे हएँ ।
पहिलो चरण ः खरहाकी कहाइमे, खरहा औ कछोहाकी दौड सुरु होत हए । जल्दी भाजलेनबालो खरहा फिर मद्दे भाजन बारो कछोहासे हारो होत हए ।
दुसरो चरण ः जब खरहा हारजात हए बा के अच्छो नाए लागत हए बो कहत हए कि एक दफे फिरके दौडाभाजी करएँ । बिचारो कछोहा का करए फिर मञ्जूर हुइजात हए कहत हए चल ठीक हए दौडलेमए । दौड फिरसे सुरु होत हए । दुसरो चरणमे डरानो भओ खरगोसकी जीत होत हए अब खरगोस कहत हए अब ठीक हए एक दफे तए जीतलओ एक दफे मए ।
तिसरो चरण ः अभे मिर चित्त ना बुझो हए काहेकी तिर कहाईमे मए २ दाओं भाजडारो हौं मए जित्तो ढीलो(मद्दे) होएसे फिर एक दफे मेरु कहाईमे दौड करन पडो । कछोहाकी जा बात सुन्तए खरगोस उछरपडत हए, खुसिकमारे गद्गद् हुइजात हए औ कहत हए जीतनो दूर जहाँ बता मए तयार हौं । जा बात सुनके कछोहा कहत हए ठीक हए आपन नौरंगा विचवासे लैके भागेश्वर चीनी मील तक दौरङ्गे मन्जूर हए कि ना? खरहा मन्जूर हुइके खुसीके मारे अपात नाए हए अब दुनेकी मन्जूरीसे दौड सुरु होत हए । जब खरहा दोंदा किनारे पुगत हए देखत हए ता दोंदा बहाड हए अब बो ता इतेसे उते दोंदाको ढीहो ढीहो फिरत हए तबतक कछोहा फिर पुगियात हए खरहा तड्पत होत हए । कछोहा डुबकनी मारके बो पार निकरजात हए औ भागेश्वर चीनी मील पुगजात हए । जा दफे फिर कछोहा की जीत हूइजात हए ।
चौथी चरण ः खरहा बहे ढीहोमे सोचत हए कि मए २ चोटी दौड करबाओ त एक चोटी इकल्लो जीत करपाओ । कछोहा एक चोटी दौड करबाइ ता २ चोटी जीत डारी । अब खरहा कहत हए कि आपन दुने मिलके चलएँ एक दुसरेके समस्यामे सहयोग करङ्गे तए नदिया नरबामे अपन पीँठमे चढाएके उखार दिए मए तोए जल्दी जरुरत पडैगी ता तोए जल्दी पुगादेहौं । जा बातमे दुने मञ्जूर हुइके अब बे दुने सल्लाहमे सम्झौतामे चलत हएँ अब विनको जीवनमे कोइ समस्या नाए हए ।
ऐसिए तमान बात आपनकी समुदाय, समाजम, गाउँठाउँमे दिखात हएँ । जौन अपनाके खरहा हानी सोचत हए उनके फिर समस्यामे कछोहा जैसेनकी जरुरत पडत हए । तमानसे आदमी ऐसे फिर हएँ सेतो से सेतो नाए कहिके कारो कहत होत हएँ । जे ऐसे गर्वमे अँध¥याने आदमीके फिर एक दिन सच नजर आत हए तओ पचतान पडत हए तबहीमारे आपन सबएके मिलके चलन जरुरी हए जा बात कल्ह नाए आजए सोचन हए सबएके । समुदायमे मिलके चलनोमे समस्या समाधान फिर हए । तबही जा छोटीस् कहानीमे पहिली , दुसरी औ तिसरी चरणकी बातसे अच्छी चौथी चरणकी बात हए जा छोेटीस बातमे जहे नैतिक ज्ञान बाँटन चाहो रहौं ।
धन्यबाद ,
रासस , सबेराे अर्धबार्षिक पत्रिका अंक पहिलाे

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