सासु और बहु कि कहानी ,जैसी करनी बैसी भरनी

सासु और बहु कि कहानी ,जैसी करनी बैसी भरनी

धनगढी,२३ अगहन ।

एक गाउँमे छोटोसो परिवार रहए । बो परिवारमे दुई मियाबिबि और एक बुढि ऐया रहत रहए । एक दिन लौडा कहि अपन बैयारसे रि जा साल मयँ ऐयाके तिरथ हँदबान लैजामंगो तय सब तयार करदिए । तओ बैयर कहि ठिक हए । सासु के तिरथमे लैजान ताँहि ढुटाको लडुवा बनाइके धरदै औ लोगाके कोइपता नाहए ।
लौडा – सब समान धर्दौ हए ।
बैयर – हाँ मय सब सम्हार दौ हौँ ।
अब लौडा आपन ऐयाके लैके तिरथ जात हए । हाँदानबाली घाटमे दुने जनि हाँदाएके आतहएँ । तओ लौडा ऐयासे कहत हए ।
लौडा – ऐया तए हिनपर बैठो रहिए मय तिर ताँहि बजारसे समान खरिदके लिआमौ ।
ऐया – अहाँ ।
लौडा समान खरिदनके ताँहि हुनसे चलो जात हए । एक घरि पच्छु एक बाबा आएत हए ।
बाबा – माता तय कहाँ आओ हए ।
ऐया – तिरथ हँदवान मिर लौडा लाइरएँ ।
बाबा – का लैके आओ हए ?
ऐया – अपन झोलीमे हात डारी भुसिसे बने भए लडुवा दिखात कहि मिर बहु मिर ताँहि जहे बनाइके पठैहए ।
बाबा – मोके ला माता जि ।
बुढि ऐया झोलिमैसे लडुवा निकारके बाबाके दइदेत हए । बदलामे बाबा फिर अपन झोलि मैसे प्रसाद निकारके बुढियके दै के खानके कहात हए । बुढि ऐया प्रसाद खातय कि जमान हुइजात हए । अब बजारसे समान लैके लौडा आतहए ।
लौडा – हिन पर मयँ ऐयाके बैठाएके गौ रहौँ । कहाँ गइ मिर ऐया , हराए त न गइ ?
हुन पर बैठि एक जवान लौठिया मस्की ।
ऐया – महि तिर ऐया हौ ।
लौडाके विश्वास ना लागो ।
लौडा – “ऐसे कैसे हुइगौ सब , मिर ऐया त बुढि रहए ।”
ऐया – जब तय बजार गौ तओ थोरी देरमे एक बाबा आओ । बाबा मोसे कहि माता जी तय का लाओ हए तओ मय झोली मैसे निकारके लडुवा दिखाओ ।तओ माेसे खानके मागि बदलामे बाबा मोके प्रसाद दै और खान कहि । प्रसाद खातय कि मय ऐसो हुइगौ ।
लौडा – ठिक हए तओ ।
अब , ऐया लौडा तिरथ से लाैटके घरे आए । घरे पुगतय कि बैयार भबरौद गरियान लागि ,“ ऐयाके तिरथ हाँदबान कहिके लैगाै , ऐयाके बाहाएके लौडिया लैके आइगौ हए, सैदा जा ।”
लौडा – नाए रि जहे हए मिर ऐया ।
ऐया – हाँ , महि हौ रि बहु ।
सब बात विस्तारसे सुनाइ । बुहु लालचि रहए , तओ कहि तय मेरु ऐयाके तिरथ हाँदबा ला। लौडा कहि ठिक हए तओ समार दिए । भोर कि भुरारी लौडिया अपन ऐयाके ताँहि खोबय बढियासे तिलके लडुवा बनाइके तयार करदै । दुसरे दिन सासु समाद तिरथ चलदै । तिरथमे पुगके
लौडा – सासु तुम हिन पर बैठे रहियो मय बजारसे थोरी समान लैयामौ ।
सासु –अहाँ ।
थोरी देरमे फिर के एक बाबा आओ और कहि माता जी कहाँ पर अएहौ ।
सासु – तिरथ हाँदानके आएहएँ ।
बाबा – का लै के आए हौ ?
सासु – तिलके लडुवा दिखात कहि जे मिर लौडिया बनाएके पठाइ हएँ ।
बाबा – मोके ला महु खामंगो ।
सासु – एक लडुवा निकारके दइदै ।
बदलामे बाबा अपन झोलिमे हात डारी और प्रसाद कहिके खानके कहि । प्रसाद खातय कि आदमीसे सोरिया बनगै । अब आओ दमदा । हिन पर मय अपन सासुके बैठाएके चलो गौ रहए कहाँपर गइ । हरायत ना गइ ।
लौडा – हिन पर मय सासुके बैठाएके गओ रहौ कोइ देखे हौ ? अब कहाँ गइ हएँ ।

साेरिया बनि बैठि मस्कि
सासु – महि हौ दमदा तुमहर सासु ।
लौडा – कैसे हुइगौ जा सब मय तुमके अच्छो छोडके गओरहौ ।
सासु – सब विस्तार से दमदाके सुनाइ ।
अब दमदा सोरियाके लैके घर आनलागो तओ बस बाले बसमे बैठन ना देमय । तओ उनके बहुत हातपाँओ जोडके सौ के बदला दुई सौ रुपैया दैके बसमे बैठाएके लदबद लइके आओ हए । घर पुगतय खिना कि फिर घरमे बैठि बैयार गरियान लागि ।
बहु – “पहिले अपन ऐयाके लैके गओ तओ लौडिया लैके आओ अबखिर मिर ऐया के लैके गौ , मिर ऐयाके बहाएके सोरिया खरिद लाइहए जा सैदा ।”
लौडा – नाए रि जहे हए तिर ऐया ।
सासु – हाँ रि ललो महि हौ । सब विस्तारसे सुनाइ , एक बाबा आओ मोके प्रसाद दइ और मोसे प्रसाद खान कहि मय प्रसाद खातय कि ऐसो बनिगओ ।
अब का करन पडो सब दुनियाँमे हल्ला–खल्ला भओ । तओ अकासबाणीसे आवाज आई जा अपन बुढि सासुके अच्छो ना मनात रहए । तहिक मारे ऐसाे भओ । अब एक गड्डा खोदके बोमे अपन ऐयाके बैठाएके उपर खटियामे अपन सासुके बैठाएके हँदबानसे सासुको हादवाओ भओ पानीसे जक ऐयाके उपर पडैगो तओ पहिले हानी सब ठिक हुइजाबैगो । जा सुनके हल्दि–हल्दि बहु गड्डा खोदि और जैसी अकासबाणीमे कहि वीसी करि । तओ जाइके सोरिया से आदमि हुइगै । जैसी करनी बैसी भरनी । बात रहे सबपड गइ ।

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