लाेपन्मुख नाँचमे ३२ राग काैन रागमे कैसी गित ,भिडियाे सिहत

लाेपन्मुख नाँचमे ३२ राग काैन रागमे कैसी गित ,भिडियाे सिहत

कैलाली , ३१ सामन ।

ठडिया नाँच कि एक चिनारी

बहुत पहिले एक समय कि बात हए अन्जकि काेख से हनुमान काे जन्म भव रहए । एक दिन हनुमानके बेढमजाेर से भुख लागि भुख मिटान ताँहि अइयासे खानु मागन लागाे तव बुक अइया कहि रे भइया बहुन पर जा लालबेर ताेरके खा लिए ।

जब हनुमान बेर खान गाै छाेटी छाेटी बेर बुक अाँखीमे न लागए । बाेके बेढम जाेर से भुख लागि रहए । तहिक मारे बाे अलमलाइगाै अाैर सबेर सबेर लाल निकराे दिनके खाइगाै । दिनके खात खिन चाराैतफ अाँधियाराे हुइगाै । सरंसारमे हा हा कार मचिगाै ।

दिन कहाँ गैभाै अभय त निकराे रहए । तव सब जनी भगवानके प्रथाना करी भगवान अन्तरध्यान हुइके देखत हए त हनुमान अपन मुहमे दिनके धरेपडे हए । अनुमानसे दिन मागत हए तव बाे दिक्कात हए ।

अब का करनपडाे किहके सल्लहा करी तव सल्लहा अनुसार सब भगवान मिलके नाँच खेली हए तहु हनुमान ना हाँसि तव भगवान स्वाम अपनय स्वाँग निकारी हए तब हनुमान हाँसी हए अाैर दिन मुहुमएसे निकरके बादरमे चलाे गाै अाै फिर से पहिलि हानि उजियाराे हुइगाै तबहिसे ठडिया नाच खेलनकाे चलन हए बतात हए माेढी कृष्णपुर नगर पालिका ३ देखतभुलीके गुलाबी राना ।

जा नाँच , घडा , मगनी , अट्टमीमे खेलत , मनाेरञ्चनके रूपमे फिर खेलन मिलत हए । जा मे ६ जनी झाँज बजान बाले हाेत हए एक जनी मदरा बजात हए अाै एक जनी महिला कपडा पैधके नाचत हए । जा नाचमे पुरूष इकल्लाे खेलत कहिके बताइ हए ।

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