सच्चि प्रेम कहानी

सच्चि प्रेम कहानी

काठमंडाै , २५ चैत ।

एक लोग एक सुन्दर लौडिया से विहा करि रहए ‘विहा पच्छु दुनो कि जिÞन्दगी बहुतय बढिया से प्रेमपूर्वक और हँसीखुशि के संग दिन गुजार रहए‘
बे अपन बैयर के गजब अच्छो रखात रहए और बुक सुन्दरतक हमेशा तारीपÞm करत रहए ‘तव कछु महिना बाद बैयरके शरिर मे अच्छो नदिखान बालो दाग से शरिर मे खौर रोग (Skin Disease) लग्गव और धिरे धिरे बुक सुन्दरता हरात जान लगो ।

अपनक ऐसो देख के बुक मन मे डर सो लागन लागो कि मिर शरिर अच्छी नादिखान लगहए और मय कुरूप हूई जनमंगो तव मिर लोगा मोके दुर दुर करन लागैगो और जा बात मय सहे नापमंगो‘

इतकय मे एक दिन लोगक कोइ काम बिशेष गाव से बाहेर जान पडिगव‘काम करके जब बो घर आनडटो रहए , तव बुक चोट लग्गाव !. बो चोट को कारण से बुक अपनी दुनो आँखी खराब हुइगइ ! बुक पच्छु तहु फिर उन कि दोन कि जिंदगी पहिले हानी चलत आत रहए‘
समय गुजरत गाओ और एक दिन बो रोग (Skin Disease) कि कारण से बैयर आफ्नो सुन्दरता पूरो चलो गओ‘

बो कुरूप हानी दिखान लागी तव अन्धा लोगा के जाके बारेम पहिले से पता रहए तहू फिर पता नापओ हानी करत रहए ‘तवहिक मारे उन कि जीन्दगी हँसी खुशी और विवाहित जीन्दगी मे कोइ असर को प्रभाव नायपडो ‘जा से बैयर के पहिली हाँनी अच्छो और प्रेम करत रहो‘

एक दिन बुक बैयर कि मृत्यु हुइगै ‘लोगा अब एक्लो रहिगओ‘ बो बहुत दुखी हुइगओ. तव बो गाँव छोडके जान ताँही रहए‘
अपन बैयर कि अन्तिम काजक्रिया घडा करि और गाँव छोड के जान लागो‘ बेहेबेरा एक आदमी पच्छु से आइके बो के बुलातय कहि रे, “अब तय बिना सहाराको इकल्लो कैसे नेगैगो और कहाँ पर जाबैगो ? इत्तो बर्ष त तिर बैयर तोके मदत करि पर अब त बहुनैयाँ.” तव बो जवाब दै कि,रे “भैया ! मय अन्धा नैयाँ‘ और मय त सिर्फ अन्धा बननको नाटक करत रहँओ‘ कहे कि यदि मेरी बैयर के पता चलजैतोे कि मय बो ना कि बुक कुरूपता के देखत हँओ तव बुक मन मे कित्तो जाधा चोट लगतो और रोगसे जाधी पिडा हुइतो‘

तवहि मारे मय इतका बर्ष अन्धा भवको नाटक करों‘ बो बहुत अच्छी और संस्कारी बैयर रहए‘ और मय बो के खुशी देखन चाँहत रहँओ”

जा से हमके का शिक्षा मिली कि अगर संगय रहना हए तव हमके फिर एक दुस्रेक कमी कमजोरी घेना आँखी बन्द करके रहन हए.. और बे कमी कमजोरी के हम देख के फिर अनदेखी करके रहन हए !

साभार :गोपाल कार्कि
काठमन्डौ,नेपाल
रानाभाषा मे उल्था भव

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