घिर आयीं कारी-कारी बदरिया।
परन लागी सगसग सग बुंदिया।।
रसीलो भीगो साओंन आय गौ।
हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देऔ।।

तीज की मोहे हाट दिखाय देऔ।
सैंया सोला सिंगार कराय देऔ।।
नये नये जर जेवर लिवाय देऔ।
होले -होले डोला डुलाय देऔ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देऔ…

हरी छींट को लहंगा लाय दयीं।
लाल‌ बाल‌ को उन्ना मंगाय दयीं।।
पतकी बारो घुंगटा जड़ाय दयीं।
हो हरबा कुठला पहदाय देवौ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देऔ….

साओन मैं डोला डारी डार डार ।
रे गुंइयां गान लागी राग मल्हार।।
हाय जिया मेरो करै रे अब रार।
बलम मोहे झुलुआ झुलाय जावौ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देऔ…

बरसन लागी रिमझिम बुंदिया।
खिल गयी मेरे मन की बगिया।।
मैया भीज गयी मोरी अंगिया।
मोहे प्रीतम गरवा लगाय लेवौ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देवौ…

तीज मैं सखियां गंगा हंदायीं।
हरी हरी चुरिया पहिने आयीं।।
बिंदिया लाल- लाल लगायीं।
हथौरी मैं मेहंदी रचाय देवौ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देऔ…

अंगिया मैं झम्पा तनी लगाय देऔ।
फुतई मखमल की सिलवाय देऔ।।
चांदी की सकरी बटन लगाय देऔ।
मेरी उंगरी मैं मुदरी पहराय देवौ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देवौ…

दांगड़े बिछिया- उ़गठी मैं पहरौं।
पहर कै पायल इत-उत डोलौं।।
पहर कै नथुनिया कित जामौं।
हांस बारी हसुलि दिवाय देवौ।।

हैं हो रेशम को लहंगा दिवाय देऔ…….

पुष्पा राणा
खटिमा,UK

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