रानाथारू भाषामे “मुक्तक”

रानाथारू भाषामे “मुक्तक”

कुस्मी सागर , कैलाली

जिन्दगीको कहानी सुनाओं कैसे ।

एकिल्लो हओं गुन्गुनाओं कैसे ।

अइसिए हए जीवन मिर त संगी,

मुटु भितरकी धड्कन हटाओं कैसे ।

मुक्तक-२

जिन्दगी सफरए सफरमे चलत हए ।

अनगिन्ती रहए रहरमे चलत हए ।

एकिल्लो भट्कटहओं हिनपर मए,

सुनसान डगए डगरमे चलत हए ।

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