मुक्तक

मुक्तक

सागर कुश्मी

धनगढी,१५ भादाै।

सब लोग जिन्दगीमे चोट सहके जियत हए ।

चोट संगे आँखीभर आँशु बहके जियत हएँ ।

जो लरत हए दुख और पिडासे जिन्दगी मे,

बेहे आदमी सफलतामे चढके जियत हए । २

चलाै संगी पुरानो इतिहास खोजन चलाै ।

सत्य तथ्य पुरा खास खास खोजन चलाै ।

पुरानो गित बाँस, कला, संस्कृति हराइगौ,

तहिकमारे मखमली फुलबास खोजन चलाै ।

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