“कोरोना” कविता

“कोरोना”  कविता

डिल्लु राना

धनगढी, ४ बैशाख २०७६ ।

खालीमूली घर से निकरन की,
जरुरत का हए ।।
मौत से हाथा पाई करन की ,
जरुरत का हए ।।
सबन के पता हए ,
बहेर की हवा हए डरपौनि ।।
खाली मूली मौत से खिलवाड़ करन की,
जरुरत का हए ।
जिन्दगी गुलाब के फूला हानि हए,
मुर्झान की जरुरत का हए ।
खाली मूली तफरी फिरन की ,
जरूरत का हए ।।
बाहर गांव मे संगीसंग फिरन की ,
जरुरत का हए ।

रानाथारू युवा मंच उत्तरा खण्ड भारत
सांस्कृतिक प्रमुख

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