रानाथारू समुदाय औ फगुहा

रानाथारू समुदाय औ फगुहा

धनगढी , २६ फागुन

होरी तिउहार

रानाथारु समुदाय होरी तिउहार के बडो तिउहारके रुपमे मानत हएँ । हिन्दु संस्कृतिमे होरी तिउहार परापुर्वकालसे चलतआएरहो पर्वहए । रानाथारु समुदायमे होरी तिउहार काहे औ कब से मनात हए कहे मनातहए कोइ खास प्रमाण नाहए तहु फिर होरी पर्व दुइ अलग अलग कहानिसे जुडि बातके अधारमे हाेरी पर्व मनात हएँ । पुर्खानकि बात अनुसार हिरण्याकश्यापुको पापको घडा भरगौ बो अपनक स्वय भगवान मानत रहए । पापके कारणसे अपनो विरानो कछुना सुझत रहए बहे कारण से अपनो लौडा पहिलाद विष्णुको भक्त हए कहिके मारन ताँही बहुत कोशिष करीर , पर विष्णुक भक्त पहिलादके बारको बाँको तक नकरपाइ । राजा हिरण्याकश्यापु एक दिन अपन बहिनीयाँ होलीका से कहि पहिलादके मारनताँहि । होलीका भगवानसे आगीसे नमरनियाँ बर्दान पाइरहए बहेके दुरुपयोग करके पहिलादके मारन ताँही भतिजो पहिलादके गोदिमे लैके जादुमय चिर ओढके बैठी औ राजाके आसेपासे सबमिलके आगी लगादइ कहत हए कि  भगवानको कृपासे जौन चिर ओढके बैठी रहए हाेलीका बहे चिर उडके पहिलादकेमे गइउढ औ होलीका वीसी रहिगइ औ आगिके लपटसे डुङगै  । दुसरी कहाइ श्रीकृष्ण भगवान  अपन ग्वालीनके संग रासलिला खेली रहएँ ।  मथुरासे लैके गोकिल तककि गोपनी संग होरी खेली बहे समयमे श्रीकृष्णके मारन ताँही राजा कंश बहुत दानबरुपी रक्षस पठाइ बे सबयनके एक एक करके श्रीकृष्ण भगवान मारगिराइ । खासकरके होरी को तिउहार असत्य उपर सत्यको विजयको खुशिमे खेलत आएरहे हएँ ।

रानाथारु समुदायमे होरी तिउहार अलग ढंगसे मानत आएरहे हएँ । माघ पुर्णमासीके दिन होरी धरत हएँ ( जा से जिन्दा होरी कहत हए । जिन्दा हारी रात रातमे खेलत हए ) । औ फागुन पुर्णमासीमे जाइके डुगत हए ( जा से  मरि होरी कहत हए , मरि होरीमे दिनमे खेलत हएँ ) । औ ८ दिन, दिनमे होरी खेलत हए ऐसीकरके एक महिना आठ दिन जा होरीको तिउहार मनात हए ।

रानाथारू समुदाय औ फागुहा

होरी तिउहारको दुसरो महत्वपुर्ण बात जा फिर हए । साली जीजाको ठट्टौली या फागुहा पर्वके रुपमे होरीको तिउहार मानत रहएँ ।फगुन महिनामे दमदा अपन ससुराल जइताे तओ साली, सरहजके फगुहा देन पडत रहए । दमदा अपन ससुराल बर्षकाे एक दाऔ जानसे अच्छाे मानतरहए ।  बैयारके पठान औ लेन सकभर घरको घरमुली या बुढे आदमी जात रहए । बो हिसाबसे फिर दमदाके अपन ससुराल जानके माैका नमिलत रहए । मुहबोली सालीसे हाँसीठँट्टा करन औ सली जीजाके पक्काे रंगसे हँदबान ताँहि फिर फागुन महिनामे जिजा अपन ससुलाल जानकाे चलन रहए । औ ससुराल घरके आदमी फिर दमदा फागुनके महिनामे फागुहा देन अएहएँ रहादेखत रहए । फागुनमे साली, ठकुराइन ( श्रीमतिकी दिदी) , सरहज ( सालकी श्रीमती ) , सइनार ( मित या दिलबरकी श्रीमती ) के फागुहा ( दक्षिण ) देनको चलन हए । 

होली तिउहारके बचानको प्रयास

पश्चिमतराइमे आदिमकालसे बैठत आएरहो समुदाय जो कि नेपालमे भुमिसंग आओ जातीसमुदायके रुपमे अपनके मानत हए । शिक्षा तथा रुढीबादी संस्कारके कारणसे लेखपढमे पच्छुपडो समुदाय मैसे एक रानाथारु हए । भिमदत्त पन्तसे लैके पंचयती शासक कुचला हाकिम तकके शैनिक रहए रानाथारु । अलिखित दस्ताबेज खोजमुलक अनुसनधानमे नालगके अपन संस्कृति छोडत जायरहे हएँ । अन्ताजी ३ लाख ५० हजार जनसंख्यामे रहो कैलाली औ कञ्चनपुर जिल्लामे सदियौसे बैठत आएरहे हए । नेपाल सरकार २०७६ माघ २३ गते रानाथारु जातिके अलग्य आदिबासी जानजातीकी सुचिमे सुचिकृत करिहए । औ कहत हएँ अगर कोइ जातके निभटान हए कहेसे सबसे पहिले बुक भाषासंस्कृतिमे धावा बोलौ सहजयसे बो जातीको अस्तीत्व निभट जातहए । कितका आदमीक पताहए लिपिके बारेम कोइ खोजअनुसन्धान नइया पर कहत हए लिपि हए । तहिकमारे रानाथारु भाषा कि अपन उनम लिपि होतय होत तहु फिर अपन भाषाके नाबचापएरहो आबस्थामे हएँ । ऐसो अबस्थामे  फिर मिती २०७६ कातिक १८ गते रानाथारु भाषा सहित ६ औ अन्य जातीके भाषानके  भाषाआयोग मन्यता दइहए कहेसे अब नेपालमे १२९ भाषा भितर रानाथारु भाषा फिर मसकत हए किहके मान्यता पाइहए । रानाथारु भाषामे प्ररारम्भिक पढाइ कार्यक्रम अन्तरगत कक्षा १,२औ ३ मे रानाथारु भाषा कि किताब  एल इ जि आर पि तयार करबाइ हए । ऐसी कहिके  राम राम मासिक पत्रिका , लखबारी पत्रिका, अमलियक जगना मोढी ,पिरियक नारायण राना ,गदरेहाक राम प्रकाश राना कि किताब रानाथारु भाषामे लिखीपुस्तक दस्ताबेजके रुपमे हए । नेपालके कैलाली औ कञ्चनपुर जिल्लमे बैठनबालेम कुछकुछमे पुसरानोपन अभय भि हए पर भारतके उतरप्रदेश , उताराखण्डके रानाथारु अपन भाषा संस्कृति सबकुछ भुलगय  । जा मे कौनको कितका दोष हए बो अपन ठाँवमे हए पर हमर जाति संगठन नेपाल रानाथारु समाज , बाह्राराणा बिकास समिती उतराखण्ड , तो अपन भाषा संस्कृतिमे चासो औ चिन्तन लैदेनरहए । ऐसी रएहए तओ कुछ दिनमे नाचके मोडि , मदारी सब कुछ हराजयहए । दुनियाँनके दिखाएके बडबड कार्यक्रम मञ्चमे बैठन इकल्लो से संस्कृति बचेहए जा नसोचके जिनके संरक्षणके ताँहि मोढी प्रतियोगिता , ठडिया नाँच प्रतियोगिता धरनसे संस्कृति संरक्षणमे टेवा पुगसकत हए ऐसो कार्यक्रममे ध्यान धरनपडो । होरी तिउहार इत्तो महात्वपुर्ण १ महिना ८ दिन तक मनानबालो तिउहार पहिले जैसो उल्लासमय पुर्वक नामनत हएँ । बहुतसे गाँवमे मोढी , ढोलिया नइय तहिकमारे नाखेलत कहिके कहत हए । तओ हमर पहिचान कसै होबैगो सबके समखान बालीबात हए । होरीमे असत्यके उपर सत्यकि विजयके खुशिमे होरी तिउहार मनाहए कहेसे हमर भितर गलत य कुबिचारके हाेरी २०७६ संग डुङगयँ नयाँबिचारको शुरुवात करएँ सबयसे अनुरोध हए । 

नन्दलाल राना

देबहरिया गाँव

विज्ञापन