” सिमरी गाँवकाे चिनारी ” रानाथारू भाषामे

” सिमरी गाँवकाे चिनारी ” रानाथारू भाषामे

धनगढी,२५ असाेज

सिमरी गाँव

‘रानाथारु डटकम’ रानाथारु भाषाको एक मात्र अनलाइ न्युज पोटल  और युटुवके माध्यमसे रानाथारु कि भाषा, संस्कृति , चालचलन , इतिहाँससे लैके रानाथारुकि पहिचान करनबाली तमान मेलकि विषय बस्तु उजागर करत आएरहो हए जहे क्रममे आज हमर टिम पुनर्वास नगर पालिका वडा नं. ५ स्थित सिमरी गाँव मे आए पहुचे हए हिन पर बहुत पुरानी भिमसेन मन्दिर कि नामसे थापना भौव हए । जा मन्दिरके सचके बारेम का हए पता लगान ताँहि आज हमर टिम हिना अए पहुचि हए । जा मन्दिरको थापनासे लैके जक नामाकरणके विषयमे छलफल करन ताँहि हमर ठिन गाउके भलमन्सा , बुद्घिजीवि आइगए हए ।

गाँवको चिनारी

पुनर्वास नगर पालिका वडा नं. ५ स्थित सिमरी गाँव । जा गाँवके अगार औ सिरे दोदा नदिया हए । पछार भानुबस्ती और दखिन आइविआर डि बजार हए । धनगढी उपमहानगर पालिकाकि मोहना पुलसे १३ कि.मि दखिन जा सिमरी गाँव पडत हए ।

हिनापर शुरुमे सात परिवार  आइके बैठे रहएँ । गाँव बैठनपेति हिनापर पहिले  सिमरक बन रहए सिमरक बडेबडे रुखा रहए तहिक मारे ज गाँवको नाँव सिमरी हुइगौ । पहिले दोदा नदिय न रहए इतइ बेडम सिमरा रहए पछु जब दोदा आओ हए तव रुखाके पोहाए लैगो बताइ हए तिर्थराज राना ।

जाके आसपास पुरो बन रहए । वि.स. २०२८ साल मे आएके राजा महेन्द्र बन कटाएके पुनर्वास बैठाइ तव से एक दम बस्ती बढीहए बताइ । गाँवके पछार बडो ताल रहए तालके किनारेसे थोंदगडा नाँवको कुला  बहत रहए । तालको पानी और हारको पानी जहे कुला हुके निकरत रहए ।

भिमसेन थापना

बहुत पहिले कि बात हए तालके किनारे से डगर रहए जब बो डगरहुइके लडिय छिरती तव लडियाके तरेसे लोह अटक जाबै बहुत दप्फेर आइसी भौ तव गाँवक आदमी कहि चलौरे जक खोदके निकारए । जब खोदन लागे तव बो भितर जाबए तव खोदत खोदत थक गए ना खोद पाइ तव कहि चलौ आब जक पाट देमए अब त जा लडियामे न इटकैगो ।

जब बोक पाटत हए तव बो उपर निकरत हए । जा बात आसपासके गाँवमे फैली तव एक आदमी बहे डगरसे छिरो हाल्लाखल्ला सुनि तौ बो बात बतकान लागो कि द्वावपर युगमे पाँडव बनबासमे आएरहए तव बे जहे डगर हुइके पहाडघेन गए रहए बताइ । बो कहि कि शारदा नदिय पहिले बहुत बडि रहए गोकिलपुर , खड्डा , कंकर सब डुवान होतरहए ।

बो बेरा टुडिया नाँवको एक राक्षेस ( दानमा ) रहए । बो रक्षेस नदियके आरपार करात रहए औ बो के बदलामे एक आदमी खानके मागत रहए । तव जब बो पाँडबके नदिय उखारी तव काहि कौनके मय खामौ तव भिमसेन कहि मोके खइए । तव भिमसेन रक्षेस से कहि मुहुबा मय अपनय तिर भितर कुचजामंगो तव राक्षेस वीसीकरी और भिमसेन अपन गदा लैके भितर कुचिगौ ।

जिन्दा भिमसेन पेटभितर कुचिगौ रक्षेसके फिर अगठो लागो हुइहए तव बो कहि अब जक कैसे मारनपडो तव बुक दिमागमे आओ पानी पिनपडो पानीम बुडके जा मरजाबैगो । तव  रक्षेस पानी पिन लागो अब पेटभितर कुचो भिमसेनके अगठो भौ तव भिमसेन अपन गदासे भितर कुचो कुचो मारी हए त गदा पेटफारके बाहेर पचकडिया गाँवके पछार एक बडोसो बरगदको रुखा रहए बहे रुखाके बिच फारके गदा गिरो हए तव भिमसेन बाहेर निकरो हए ।

भिमसेन अपन गदा लेन गौ तव बो पाँच डेगमे पचकडियामे पुगी गौ तहिक मारे बो ठाउको नाँव पचकडिय बजिगौ बताइहए स्थानिय व्यक्ति भलमन्सा फुचन्द राना । उनकि कहाइ कि जब बो टुडिया नाँवको रक्षेस मारो गौ बहेक हातक पहुचाक हड्डा से थोँदगडा कि पानी रोकन ताँहि बाँध बाँधिहए बताइ औ

“ कहि कि जाब उन कि अइया खानु पकान ताँहि पानी लेन गैहए त पचकडियक पच्छुक एक नरखरा रहए बो नरखराको पानी डेढ गगरीया पानी भौ” बताइ तहिक मारे बुक नाँव डेढगगरिया धरिगौ ।

भिमसेन थापनाको महत्व

गाँवक लोगनको जन विश्वास हए कि ज भिमसेनके  नाँवसे ज गाँवमे चोरी, लुटपाट, आगीलागी जैसो घटना अभय तक नदेखन पए हए बताइ जहे गाँवके पुजारी सिबराम राना । बे कहि कि पहिले गाइयाँ , बर्धा छोडके चुगात रहएँ ।

बर्धा हराजातरहएँ उनके ढुडके थक जात रहए तव जा भिमसेन के मनात रहए हे भिमसेन मिर बर्धा जहाँ फिर होबए मिर घर अजाबय तव मय तोके पुजा देमंगो कहत रहए तव दुसरे या तिसरे दिन अपनय बर्धा घर आजात रहए बताइ ।

और बे कहि कि गाँवमे कबहि आगि नलागि कहेकि गाँवके आदमी भिमसेन के मनात हए कि भिमसेन आगिसे हमर गाँव बचैए कहेकी पहिले घाँसकी छाँनि होतरहए तव एक घरमे आगि लागत रहए त पुरो गाँवमे आगि लगजात रहए । तव गाँवक आदमी घाँस काटन जैते तव एक एक घाँसको पुरा भिमसेनकी मडैया छानताँहि देत रहए कहिके बताइ पुजारी राना ।

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