पहिचान दिन मे अन्यौलता काहे ?

पहिचान दिन मे अन्यौलता काहे ?

धनगढी,१६ माह ।

बर्षौसे पहिचानकी लडाइमे हुमे रानाथारु समुदाय सुचिकृत पच्छु पहिचान दिनमे अन्यौल हए ।
नेपाल सरकार मन्त्रिपरिषद २०७६ साल माघ २० गते रानाथारु जातिके अलग आदिवासी जनजाति कि सुचिमे सुचिकृत भओ कहिके निर्णय करिहए । पर मन्त्रिपरिषदको निर्णय माघ २३ गते एक कार्यक्रमके बिच रानाथारु जाति अलग आदीवासी जनजाति कि सुचिमे सुचिकृत भओ कहिके सार्वजनिक करीरहए ।
अब प्रश्न का उठत हए कौन दिनके मनामएँ पहिचान दिन । समुदायमे अन्यौलता छाइगओ हए । इतका इकल्लो ना हए नेपाल रानाथारु समाजके केन्द्रिय उपाध्यक्ष कमलसिह राना रानाथारु डटकमको इन्टरभ्युमे कहिहए माघ २० गते सबय रानाथारु ददाभइया,दिदीवहिनियँ सबजनि साँझके अपन अपन घरमे दिप प्रज्वलन करके दिवस मनान अनुरोध करीहएँ । उनकि कहाइहए गओ बर्षमे माघ २३ गते मनाए काहेकि २३ गते सार्वजनिक भओ पर मन्त्रिपरिषदकि निर्णय त माघ २० गते भओ हए कहिके अपन तर्कधरीहए औ बे कहि, जैसीकि बच्चा जन्मलेत हए शुरुक बर्ष मे जब सठी खान जात हए तओ इकल्लो पतापात हए कि ये फलानोक बच्चा जन्मो कहिके पर जन्म दिन त जौन दिन जन्मो बहेदिन मनात हए तहिक मारे नेपाल रानाथारु समाजकि केन्द्रिय कार्यसमिती माघ २० गते पहिचान दिन मनान कहिके निर्णय फिर करिहए कहिके बताइ हए । और सार्वसधारण कि बुझाइ हए कि जौन दिन सार्वजनिक भओ बहेदिनके पहिचान दिन मनान बताइहए । बात अधिकारीक्तामे हए अधिकारीक रुपमे माघ २३ गते रानाथारुके आदिवासीजनजातिमे सुचिकृत भओ कहिके सार्वजनिक भओक मारे माघ २३ गते सुचिकृत दिवस मनान चाहो बताइ हएँ । ऐसिकरके पुर्व माननिय नारदमुनि राना कहिहएँ सबय जनैनको अथक प्रयाससे रानाथारु जाति बर्षौसे पहिचान ना हुइपाइ रहए अबखिर सम्माननिय राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी औ सम्माननिय प्रधानमन्त्रि के.पि.शर्माओलीके नेतृत्व भओ सरकारसे रानाथारुक पहिचान कराइहए मय सम्माननिय ब्यक्तित्वनके हार्दिक धन्यवाद देनचाहतहौ और मय सबय रानाथारु समुदायसे अनुरोध करन चाहत हौ कि जहे माघ २० गते साँझके अपन घरके अग्गु क्यान्डिल या दिया पजारके पहिचान दिन मनान और सप्ताहाव्यपि कार्यक्रम गाउ गाउमे मनान कहिहएँ । सबके पताचलए कि नेपालमे ६०औँ स्थानमे रानाथारु जाति आदीवासी जनजातिमे सुचिकृत भए हए । तहिक मारे हरेक पर्वमे अन्यौता का हे रानाथारुको अधिकारीक औ पुर्खा संस्था नेपाल रानाथारु समाज समयमे निर्णय करके सार्वजनिक करके घोषण करदेन पडो ताकि पर्व मनाके सहज हुइजाबए ।

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