जन्म अष्टमी पर्व कैसे मनात हएँ , भिडियाे सहित

जन्म अष्टमी पर्व कैसे मनात हएँ , भिडियाे सहित

धनगढी, २९ साउन ।

अट्टमी पर्व वर्षको एक दप्फेर मनानबाराे पर्व मैसे जा एक रानाथारु समुदायको  महान पर्व हए । श्रीकृष्ण जन्म अष्टमीके दिन हरेक वर्ष रानाथारु समुदायमे निरहारा बर्त बैठके मनात हए । श्रीकृष्ण जन्माअष्टमी शब्दके रानाथारु भाषामे ‘अट्टमी’ कहात हएँ औ  श्री कृष्णके रानाथारु भाषामे ‘कान्हा’ कहात हएँ । अष्टमी तिथिमे श्रीकृष्ण ‘कान्हा’ जन्मलाइ तहिक मारे उनकाे जन्मोत्सवमे रानाथारु समुदायमे  ब्रत बैठनकाे चलन हए और रातभर गीत गाएके जागरण करके मनात हएँ । अट्टमीकि बर्त सब जनि न बैठत हए पुत्रप्राप्ति या लम्बि बिमारीसे छुटकारा पान ताँहि जा बर्त बैठत हए बताइ ।

दुइ दिन तकउल्लासमय बातावरणमे मनानबालाे अट्टमीक पहिलो दिन पुरूष या महिला दिनभर कछु नखाएके निरहार व्रत बैठत हएँ।  धनगढी उपमहानगर १५ उर्मि गाउक लिला राना बताइ हएँ । उनकी कहाइ अनुसार अट्टमीक पहिलोदिन अर्थात व्रत बैठाे दिन सबेरेसे महिला घरमे लिप पाेत करके घरकि सरसफाइ करत हएँ कहेसे अट्टमी खान आइभइ लाैडिया अजुरीया ,गुलगुला खिरा काटनमे , बिहिकाटनमे और प्रसादबनानमे व्यस्त रहतहए । बर्त बैठनबालाे लाेग या बैयर अट्टमिसे अग्गु खिरा नाखात हएँ । जब साँझ हाेन लागत हए तब क डाेला डारत हएँ । डाेल कहानसे खरिया या कट्ठक भित बनाएके बाके भितर छाेटाेसाे छाेटिसि पलखिया बनाएके डाेला डारत हए । और उपरसे पेराे कपडा या गुरखा अाेढादेत हए । एेसीकरके डाेलामे फुलाबालाे खिरा कान्हा मानके धरत हए और आसपासकि भितमे जियातियाकाे चित्र बनादेत हए ।

 जाब रात हाेनलागत हए तव बर्त बैठनबालाे डाेलाके अग्गु आमकि सुखिडार और होम धरके पुजा करत हए एेसीकरके जब तक रातमे जाेन्ही ना दिखात हए तबतक बर्त खोलन नपात हए पर बदरी लगाेहए कहेसे रातको १२ बजे पच्छु बर्त खोलन मिलजात हए बताइ , रातमे जागरण करन ताँहि काेइ काेइ प्रेमसागर , विस्राम सागर लगायतकि धार्मिक किताब पढत हए काेइ कान्हाक जन्माैटी गित गातहए त काेइ नाँच खेलत हए काेइ घुसीघुसा लगात हए । घुसीघुसा कहेक कुस्ति लडनकाे चलन रहए , गाँवके एक से एक बली द्वाराे गेँसके ठाडत रहए , काेइ माइकाे लाल हए कहेसे जा द्वाराेसे बाहेर निकरके दिखाबय कहिके चुनाैति देतहए । एक से एक पहिलमान अपन बल दिखात हए अट्टमी पर्वमे ।अट्टमी पर्वमे पुरूष  ठडिया नाँच खेलत हए त मिहला बैठक्कि गित गएके रातभर जागराम करने बहुत   बढियासे मनात हए ।

जाब सबेरे हाेत हए तब छाेटे छाेटे बच्चा खेतसे कुसकाटके लातहएँ । घरबाराे बाेमे दुध , हर्दि डारके घाेरत हए पेराे पानी पहिले अपन घरके आसपास सिचन लगात हए और बहे पानी  गाँवके प्रत्येकके घरमे घरमे जाइके छिर्कत हए और  घरमुलिक टाँगमे डारन चलन हए और घरमुली आसिर्वदके संगय दानदक्षिणा देतहए । एेसाे करनसे घरमे रोगव्यध प्रबेश नकरपाबै कहिके जनविश्वास हए , । एेसी करके दोस्राे दिन ठाडिया नाँच फिर सब घरमे बताैनि देन जात हए ।

जब साँझ हाेत हए तब कन्हैयक बिधिविधानसे सठी करत हएँ । सठीकि उपलक्ष्यमे गाँउभरके सबके खानुखान बुलात हए । एेसीकरके जन्मअट्टमिकाे तिउहार मनात हए बताइ । बाँकि भिडियाे मे……

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