बर्षि पुजा कब और कैसे

बर्षि पुजा कब और कैसे

धनगढी,२३ जेठ ।

असाडी पुजा खेरोको पुजा ,नगराही को पुजा या भुमि पुजाके रुपमे बर्षि पुजा पुजो जात हए । भुइया तिन प्रकारकि होत रहए पहिली ब्रह्रामणी , दुसरी सैहारी और तिसरी दन्तारी । गाँवमे रोगदोषसे मुक्त पान और बर्ष भरको रकममे किराकरमोलासे बचाएके रखान बढिया होबय कहिके पुजो जात हए । रानाथारू समुदायमे भुइयाँ पुजन प्रथा कबसे चलाे कहिके काेइकि एकमत नहए । जा एक कहानी के माध्यमसे सबबिस्तार हए ।
राजा बेन की बैयर माता भवानी की परम भक्त रहए । उनकी भक्ति से खुशि हूइके देवीमाता उनहिक पेटसे कन्या के रूप मे जन्म लेनकाे वरदान मागि रहए । कालांतर मे रानी के गर्भ से सात कन्या को जन्म भओ । सात कन्यको जन्मसे राजा बेनके साम्राज्यमे भुखासुखा मचिगओ बे सात कन्या बच्चनके खावान ताँहि राजा ठिन कछुनरहिगओ तओ राज बेन कि बैयर कहि यीनके बनमे लैजाएके बहाएआ जे चहुजो खाएके अपन पेट भरएँ तओ राजा बेन अपन सातौ लौडियनके वनमे फुरसा खावन करके लैगो और वनमे लैजाएके उनसे कहि तुम हिन खेलीयो और मय अभय आइगओ कहिके बुटामे कम्मरकि घोकि ओढाएके हुनसे भाजिआओ । बहुतदेर पच्छु बे कहि दउवा अभय तक नओकहिके जब देखन गइ त हुना पर कम्मर बुटाउपर धरोपाइ ।तओेखिर बे अपन घर आनियाँ डगर फिर भुलगइ और बे सातौ दिदीबहिनिया वीसि घुमन लागि और बे सोचि कि अपन संग लौडा होन जरुरी हए और बाेसे आपनकि सुरक्षा फिर हुइजाबैगो ताव बे अपन शरिरको मइल छुटाएके इकट्ठा करके आदमीक रुप बनाइ और अपन शक्तीसे बामे ज्यान डारी और बक नाँव लंगुर धरी , एैसिकरके भाइयाक जन्म दइ ।अब बे घुमतघामत भवानी रुपी कन्या तराई के बिभिन्न स्थानमे स्थापित हुइके माता भवानीके रूपमे पूजिजात हए । कोए दर्गा माता , कोइ कालीमाता ,बनस्पती ,पुर्वि , अँगरमति , फुलमति , संकटा आदि नामसे पुजो जात हए और अठौ लंगुर नामसे अलग पुजा असाडीमे पुजोजात हए बताइ पुनरवास गोकिलपुरके गौटेहरा सगराम राना ।
धनगढी उपमहानगर पालिका ७ के भलमन्सा जगन्नाथ राना कि बात अनुसार बहुत पहिले कि बात हए तराईको फाँटा प्राचीन काल से दैविशक्ति से तपो रहए । हिन विभिन मेलके भुतप्रेतनकाे वास रहए । तहिकमारे यिनसे बचन ताँहि हिना पहिले से हि कन्यरुपि सात भवानीको पुजा करोजात रहए । जा कहानीे महाभारत से जुडी हए प्राचीन कालमे राजा बेन की सात लौडियाको जन्मसे जोडो हए, जौन भुइयाँ के रूप में तराई के हर गावमे स्थापित करके पूजत आएरहे हए ।

कहत हए महाभारत कालमे राजा बेन को खेराे ( साम्राज्य ) नेपाल से लैके पीलीभीत , देहुआ नदी किनारेसे गोमती नदीय और सीतापुरको हरगांव तक फैलो रहए । राजा बेन के सात लौंडिया और लौडा विराट रहए । जब पांडव १२ वर्ष वनवाससे लाैटके एक वषको अज्ञातवास राजा विराटके साम्राज्य में बिताइ रहए । जको प्रमाण मोहम्मदी तहसील की बलमियां बरखर मे मिलत हए । हुनापर महाभारत समयमे बने ताल और मंदिर पांडव के अज्ञातवास के सांक्षी हए ।
राजा बेनकि बैयर शिव कि परम भक्त रहए । राजाके कोइ सन्तान नरहए सन्तान प्राप्तीके ताँहि राजारानी बहुतसे यज्ञ पुजापाठ करी तव जाइके सात लौडिया और एक लौडा भओ ।राजा बेनकि पुत्रिनके नामसे आज दुनिया उनके मानाेजात हए ।
लखीमपुर मे संकटादेवी, शीतला देवी, वंकटा देवी, लालीता देवी, गोला की मंगला देवी और उत्तराखंड की मंसा देवी, पूर्णागिरि देवी राजा बेन कि लौडिय स्वरूप कन्याएं मानी जाती हए । और इन्हीं के नाम से सात कन्याक पुुजा करन की परंपरा चलतआइहए ।
अभय फिर भारतको खीरी जिला के बिजुआ मे शाहपुर नामक गाव के किनारे महाभारत कालीन राजा बेन को महल और किला हए । राजा बेन अपन महलके ढिंगै सुंदर और बडोसो ताल बनवाए रहए । तालके बीचमे मुख्य मंदिर रहए, अब बो नहए । बोके खम्बा और अवशेष आज फिर इतय उतय बिखरे पडे हए कहत हए , कि राजा बेन अपनी लौडियनके हाँदानके ताँहि और मनबहिलान ताँहि मंदिर को निर्माण कराइरहए । जा तालमे कभी बहुत कमलके फुला फुलो करत रहए पर अब पुरो तालमे जलकुम्भि इकल्लो हए । तालको आसपास कि जमिन कबजा हुइगओ हए ।
तालके किनारे एक छोटी सी देवी मंदिर हए बताहए पहिले जा ठाउमे बडि मंदिर रहए । बहुत पच्छु स्थानीय लोग मिलके बहेठाउमे एक छोटीसि मन्दिर बना दइहए । तालके अगार एक ऊंचोसो डुँगरी हए, जौन गईनाथ मन्दिर ताक के बीचमे पडतरहए । बतात हए कि जहे डुँगरी के तरे राजा बेन को महल को खंडहर दबाे हए । तालके अगार दुइ पुराने मठ और चाैतरा बनाेहए , उनसे कहत हए जे राजा बेन और उनकी रानी की समाधि हए बतात हए । सन १९९८ में ताल तक जानके ताँहि बाबा भिखारी लाल राना एक पुल बनवाइ रहए । तालमे एक कुइयाँ फिर हए , पर बो तालकि जलकुंभी के कारण अब दिखाई नदेतहए ।
अषाडि पुजा कब और कैसे मनात हएँ ।
अषडि पुजा से बर्षि पुजा फिर कहत हएँ । जा अषड महिनाकि उजियारीक पहिलो सुम्मबार या विस्पतके रोज करत हए बताइ मनेहरा गाँवके समाज सेवी भंगी भगत राना ।घर–घरसे उठो भओ भेट फुला आगर बत्ति पुरी पकाएके सब मिलके भुइयाँमे जात हए और सातौ भवानीको नामसे गाँवको गौटेहरा पुजा समान चढात हए । पहिले बली चढात रहए । और अषाडि पुजा पच्छू ताइ बैठान मिलत रहए जा से अग्गु ताइ बैठाइ हए कहिके गावके लोग पतापइते तव डन्ड करत रहएँ । जौन दिनसे होरी धरती बहेदिनसे पुरीपकनियाँ ताइ बैठान नपातरहए फिर बताइ रहएँ भगत जी ।

खाेजखबर से

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