देखओ जा फौजी किरा

कैलाली , २ कातिक २०७६ ।

“हिँ, हिँ , हिँ .”.. इतबारी उँटियामे बैठो रोत हए। तभै मगरु इतबारिक घर पुगत हए। मगरु धिरेसे इतबारी ठिन पुगत। हए । डराए डराए पुछत हए ,” इतवारि आज कौन , कौनक का हुइगओ? ” इतबारी फिर रोन लागत हए , ” हिँ हिँ हिँ… का बतामओ मगरु , हिँ हिँ हिँ … मएत बरबाद हुइगओ। देखत मिर खेत पको धान का हुइगओ। कौन दुस्मन मिर पच्छु पडो हए ।

पहिले जेल … अब मिर खेतक धान सब खतम कर्दै। हुँ हुँ हुँ… । ” मगरु औ इतबारी दोनो खेत घेन जात हएं तभै जेटियो कि टिम खेत देखन आत हएं। इतबारी फिर रोन सुरु करत हए तबही एक जेटिए सम्झात हए,” देखओ जा फौजी किरा हए । जे दिन मे लुकके बैठत हएं । और रात होतए बाहिर निकरत हएं औ धान , भटमास जो पामए सबए खाएदेत हएं।

जे दिनमे दुइ तीन सय अण्डा देत हएँ औ दुई दिनमे किरा बनत हएँ। अभए रोनधोन कि समए नैयाँ जाबओ जा विषाधी खेतमे छिर्कौ। जाबओ अब देर करके कोइ फाइदा नैयाँ। ” मगरु औ इतबारी दोनो घर जाएके पुरो गाँव बारेक खबर करत हए। अभए गाँवके लोग मनै अपन अपन खेतमे दबाइ छिँच रहे हएं…

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